उत्तराखंडधर्म-संस्कृति

बुरांसखंडा में फलदार एवं औषधीय पौधों को रोपकर ‘हरेला-पर्व’ की शुरुआत

देहरादून, रायपुर स्थित राजकीय इण्टर कॉलेज बुरांसखंडा में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘हरेला पर्व’ को त्योहार के रूप में मनाने के लिए शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आमजन के सहयोग से स्थानीय स्तर की जलवायु के अनुरूप छायादार, फलदार व अन्य जीवनोपयोगी औषधीय गुणों वाले मुख्यतः बाँज, अखरोट, अमरूद, आँवला, नीम, गिलोय तथा सहजन जैसे गुणकारी पौधों के रोपण से पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन में योगदान देने का संकल्प लिया गया है।
कार्यक्रम को धरातलीय रूप देते हुए देहरादून के विकासखंड रायपुर स्थित राजकीय इण्टर कॉलेज बुरांसखंडा में प्रधानाचार्य के मार्गदर्शन में शिक्षकों, कार्यालय कर्मियों, वन विभाग एवम् जागरूक अभिभावकों के संरक्षण में विद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए बुरांसी वन में पिछले रोपे गए पौधों की देखभाल के साथ ही वर्तमान में जलवायु के अनुसार नई पौध रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस हेतु पौध मसूरी रेंज के एस डी ओ श्री उदय गौड़ जी एवं स्टॉफ के सहयोग से उपलब्ध किए गए।

 

पर्व की पूर्व संध्या पर विद्यालय की ईको क्लब टीम द्वारा वरिष्ठ प्रवक्ता कमलेश्वर प्रसाद भट्ट, ईको क्लब प्रभारी नेहा बिष्ट एवम् सदस्य सुमन हटवाल के नेतृत्व में गत वर्ष बुरांसी वन में रोपे गए पौधों की निराई गुड़ाई की गई। रोपे गए पौधों में लगभग सभी पौधें स्वस्थ पाए गए, हमारे लिए अच्छी बात यह भी है कि भावी पीढ़ी विशेष रूप से स्कूली बच्चे पहाड़ के पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के प्रति चिंतनशील हैं। पर्यटक स्थल होने के कारण यहां पर पौधों को संरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण भी है, जिसके लिए आमजन का सहयोग आवश्यक हो जाता है। उदाहरण के तौर पर पहाड़ों की शुध्द हवा का दिनों दिन दूषित होने का कारण जंगलों में आग व पर्यटकों द्वारा बहुत अधिक मात्रा में प्लास्टिक व पॉलिथीन का प्रयोग। जंगलों में आग के लिए मानवीय जिम्मेदारी को प्रमुखता से लिया जा सकता है, वहीं पौधे रोपने के बाद उनकी सुरक्षा के लिए आमजन के सहयोग की बात दोहराई गई।
विद्यालय के प्रधानाचार्य एन वी पंत ने बच्चों व स्टॉफ से इस पर्व की सफलता का आह्वान करते हुये कहा, कि हमनें अपने पूर्वजों व बड़े-बुजुर्गों से प्रकृति के साथ तालमेल करते हुए जीवन जीना सीखा है। हमारे लिए पर्यावरण के मुद्दे केवल तकनीक से संबंधित नहीं है, बल्कि वास्तविक नैतिक मुद्दे हैं। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ आंदोलन की शुरुआत का अवसर मिला है, यह हम सबके लिए गौरव की बात है।
इससे पूर्व विश्व पर्यावरण दिवस पर भी विद्यालय ईको क्लबद्वारा वन विभाग के सौजन्य से उपलब्ध करवाए गए स्थानीय प्रजाति के पौधे छात्र छात्राओं को वितरित किए गए, पौधों के सरंक्षण की पूर्ण जिम्मेदारी बच्चों द्वारा ली गई।
वरिष्ठ प्रवक्ता कमलेश्वर प्रसाद भट्ट ने बताया कि बुरांसी वन, वन विभाग के मसूरी रेंज द्वारा वर्ष 2016 में विकसित किया गया था। तत्कालीन वन क्षेत्र अधिकारी श्री मनमोहन सिंह बिष्ट के परिश्रम, त्याग और समर्पित भावना से प्रोत्साहित होकर विद्यालय ईको क्लब द्वारा यह वन गोद लिया गया था। बताते हैं कि उस समय लगभग साढ़े छः हजार पौध विशेषकर बांज और बुरांस रोपित कर यह वन विकसित किया गया था। पौधों की निराई गुड़ाई और देखरेख की जिम्मेदारी सहयोगी के रूप में विद्यालय ईको क्लब द्वारा ली गई थी।
भट्ट बताते हैं कि भले ही आज समाजसेवी पर्यावरण संरक्षण हेतु बीज बम नाम से अच्छा काम कर रहे हों, किन्तु इसकी शुरुआत श्री एम एस बिष्ट जी के निर्देशन में वर्ष 2016 में राजकीय इण्टर कॉलेज बुरांसखंडा के बच्चों ने ऑर्गेनिक शीड बॉल बनाकर की थी। वे बताते हैं कि ऑर्गेनिक शीड बॉल ऐसे स्थानों के लिए बनाए जाते हैं जहां हम पौध रोपित नहीं कर पाते अर्थात् ऊंची ढालदार पहाड़ी। स्कूली बच्चों द्वारा स्थानीय प्रजाति के बीजों के अलावा जंगली जानवरों के लिए उपयोगी घास भी शीड बनाकर पहाड़ियों पर थ्रू की गई। चलचला के ऊपरी स्थान, मगरा और सल्डयाना बैंड आदि पहाड़ी स्थानों पर ऑर्गेनिक शीड बॉल थ्रू की गईं जिनका अच्छा परिणाम देखने को मिल रहा है, नंगे पहाड़ अब हरे भरे दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, इस सफलता को देखते हुए गत वर्ष बीएसएफ के अवकाश प्राप्त आईजी मनोरंजन त्रिपाठी ने कार्य की प्रशंसा करते हुए स्वयं मसूरी रोटरी क्लब की टीम के साथ बच्चों की ऐक्टिविटी में शामिल होकर बुरांसी वन में शीड बॉल थ्रू की।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य एन वी पंत, वरिष्ठ प्रवक्ता राजकुमार चौहान, कमलेश्वर प्रसाद भट्ट, भास्कर रावत, आर पी सेमवाल, प्रियंका घनस्याला, रीना तोमर, ईको क्लब प्रभारी नेहा बिष्ट, प्रमोद डोभाल, सुमन हटवाल, किशोर सिंह पँवार, विजय कुमार काम्बोज, अरुणेश चमोली, आरती जुड़ियाल सहित कार्यालय कर्मी रोहित रावत, अंकिता थपलियाल, राकेश रावत और प्रमोद आदि शिक्षक- कर्मचारियों ने इस अभियान में बच्चों के साथ सहभागिता की।

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