देहरादून

पेपर लीक मामले में न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में कमेटी गठित

देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की 21 सितंबर को हुई स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के मामले की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। नैनीताल हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी इस आयोग के अध्यक्ष होंगे। आयोग विशेष जांच दल (SIT) की जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेगा और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि 21 सितम्बर 2025 को आयोजित परीक्षा के दौरान नकल की शिकायतें सामने आई थीं। आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 के तहत न्यायिक जांच के आदेश दिए।

प्रारंभ में यह जिम्मेदारी न्यायमूर्ति बी.एस. वर्मा (सेवानिवृत्त) को सौंपने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने समयाभाव और निजी कारणों से असमर्थता जताई। इसके बाद न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

जारी आदेश के अनुसार, आयोग को अन्य अधिकारियों व विशेषज्ञों का सहयोग लेने की स्वतंत्रता होगी। आयोग का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राज्य रहेगा तथा वह विभिन्न स्रोतों से प्राप्त शिकायतों, सूचनाओं और तथ्यों का परीक्षण करेगा।

पेपर लीक का मामला

21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पन्ने लीक होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। इस घटना ने न केवल आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि अभ्यर्थियों में भी आक्रोश पैदा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पहले नैनीताल हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बीएस वर्मा को न्यायिक निगरानी में SIT जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, निजी कारणों और समय की कमी के चलते जस्टिस वर्मा ने यह जिम्मेदारी लेने में असमर्थता जताई।

एकल सदस्यीय आयोग का गठन

इसके बाद, सरकार ने गृह विभाग के माध्यम से जस्टिस यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग के गठन का आदेश जारी किया। आयोग को अन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का सहयोग लेने की पूरी स्वतंत्रता होगी। इसका कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य होगा, और यह विभिन्न स्रोतों से प्राप्त शिकायतों, सूचनाओं और तथ्यों की जांच करेगा। साथ ही, 24 सितंबर को गठित SIT की जांच रिपोर्ट का विश्लेषण कर आयोग विधि-सम्मत दिशानिर्देश भी देगा।

शीघ्र रिपोर्ट की अपेक्षा

सरकार ने आयोग से जल्द से जल्द अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने की अपेक्षा की है। इस कदम से सरकार पेपर लीक मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। अभ्यर्थियों और जनता की ओर से इस जांच के निष्कर्षों पर करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह मामला उत्तराखंड में भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है।

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