उत्तरकाशी

दो दिन बाद भी जिंदगी की तलाश के लिए ड्रोन और खोजी कुत्तों से ली जा रही मदद

सुबह से हेलीकाप्‍टर से चलाया जा रहा रेस्‍क्‍यू अभियान

 उत्‍तरकाशी, 07 अगस्‍त 2025 : चारों ओर फैले मलबे के ढेर पर बडे-बडे बोल्‍डर गवाही दे रहे हैं कि पांच अगस्‍त की दोपहर धराली पर क्‍या बीती होगी। इसी मलबे के ढेर में तलाशी जा रही है जिंदगी की धडकन, लेकिन लगभग 50 फीट मलबे के ढेर में जीवन की तलाश करना आसान तो नहीं। मलबे ने मानो चुनौतियों की दीवार खडी कर दी है। बावजूद इसके सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस के जवान पूरी शिददत से इस उम्‍मीद के साथ सर्च आपरेशन चला रहे हैं कि क्‍या पता कहीं किसी की उखडती सांस को सहारा मिल जाए । एसडीआरएफ के महानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी कहते हैं करीब 50 फीट से ज्‍यादा मलबे के ढेर में सर्च टीमों को थोडी मुश्‍किल तो आ रही है, लेकिन अत्‍याधुनिक उपकरणों के सहारे खोजबीन का काम जारी है।

हादसे को दो दिन बीत चुके हैं। दो दिन बाद भी नुकसान का आकलन करना मुश्किल बना हुआ है। धराली में दो दर्जन से ज्‍यादा इमारतें जमीदोज हो चुकी हैं। हताहतों की संख्‍या को लेकर भी ऊहापोह की स्थिति है। बावजूद इसके आज मौसम साफ है और रेस्‍क्‍यू आपरेशन अपनी द्रुत गति से आगे बढ रहा है। ड्रोन उडान भर रहे हैं तो खोजी कुत्‍तों की मदद भी ली जा रही है। हादसे में सेना के नौ जवानों समेत कुल 19 लोग लापता बताए जा रहे हैं। दो शव भी मिल चुके हैं। गंगोत्री जाने वाला हाईवे क्षतिग्रस्‍त है। ऐसे में हेलीकाप्‍टरों का ही सहारा है। कुल नौ हेलीकाप्‍टर में से सात काे बचाव अभियान पर लगाया गया है। गुरुवार को गंगोत्री में फंंसे यात्रियों को निकालने की कवायद भी शुरू की गई।  सुबह 10 बजे तक 61 लोगों को हेली से आईटीबीपी मातली शिफ्ट किया जा चुका है। रेस्क्यू किए गए लोगों को उनके गंतव्य तक भेजने के प्रबंध भी किए जा रहे हैं।  स्वास्थ्य कैम्प मातली से दो गम्भीर रूप से घायलों को एम्स ऋषिकेश रैफर किया गया। दोनों घायलों को एम्स में भर्ती करा दिया गया है।

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