
कार्यक्रम की शुरुआत कवयित्री रंजना शर्मा ने श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ की प्रसिद्ध कविता “हमें सहारा तेरा माझी” के भावपूर्ण पाठ से की, जिससे उपस्थित श्रोताओं की आँखें नम हो उठीं। इसके पश्चात प्रसिद्ध कहानीकार रेखा शर्मा ने श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ से जुड़े संस्मरण साझा किए।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे समाजसेवी रवींद्र जुगरान ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि, “श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान गिरफ्तार किए गए। उन्होंने दिल्ली के सेंट्रल सचिवालय में यूनियन जैक के सामने भारतीय तिरंगा फहराकर साहस का परिचय दिया। इसके लिए उन्हें फिरोजपुर जेल में दो वर्ष की कठोर सजा भुगतनी पड़ी। जेल में रहते हुए भी उन्होंने अपनी लेखनी से स्वतंत्रता की अलख जगाई।”
उनके इस वीरतापूर्ण कार्य का उल्लेख सूचना एवं जन संपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश की प्रकाशित पुस्तकों में भी मिलता है, जिसमें उन्हें देहरादून के सत्याग्रही के रूप में इतिहास में अमर बताया गया है।
पूर्व प्रधानाचार्य एवं साहित्यकार प्रदीप डबराल ने बच्चों को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ का जन्म उत्तर प्रदेश के दोस्तपुर (सुल्तानपुर) में हुआ था, लेकिन मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में ही वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। 1946 में वे देहरादून आ गए और यहीं साहित्य और समाज सेवा के कार्यों में जीवन लगा दिया।
संचालक पी.डी. लोहानी ने बताया कि उनके योगदान पर कई प्रमुख लेखकों और इतिहासकारों ने लिखा है। भक्त दर्शन द्वारा रचित “गढ़वाल की दिवंगत विभूतियाँ” पुस्तक में उनका विशेष उल्लेख मिलता है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “देश के वरिष्ठ साहित्यकारों ने उन पर संस्मरण लिखे हैं, जिन्हें पाँच ग्रंथों में संकलित किया गया है। इन ग्रंथों का संपादन डॉ. अतुल शर्मा ने किया है, जबकि सह-संपादन रेखा शर्मा व रंजना शर्मा द्वारा किया गया।”
कार्यक्रम में पूर्व प्रधानाचार्य नागेन्द्र जोशी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ की दो कविताएँ गढ़वाल विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी पढ़ाई जाती रही हैं। आकाशवाणी देहरादून द्वारा उनके जीवन पर एक रेडियो रूपक भी तैयार किया गया था। साथ ही, प्रसिद्ध निर्माता जयप्रकाश पंवार ‘जेपी’ ने उन पर एक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है।
श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ सम्मान, जो उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाता है, अब तक देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों को प्रदान किया जा चुका है। इनमें डॉ. गिरिजा व्यास, डॉ. हरिदत्त भट्ट ‘शैलेश’, डॉ. धनंजय सिंह, विवेकानंद खंडूरी, रवींद्र जुगरान, गोपाल नारसन, जगमोहन सिंह नेगी, प्रदीप कुकरेती, रामलाल खंडूरी, और जयप्रकाश पंवार ‘जेपी’ जैसे नाम शामिल हैं।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों ने मिलकर देशभक्ति की भावना के साथ भाग लिया। उपस्थित सभी लोगों ने श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके सपनों के भारत के निर्माण का संकल्प लिया।



