मनसा देवी हादसे से सबक: अब मंदिरों में सुरक्षा के साथ होगी अतिक्रमण पर सख्ती

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में बड़े धार्मिक स्थलों पर वीकेंड और महत्वपूर्ण दिवसों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते है. ऐसे में मनसा देवी में दो दिन पहले ही हुई भगदड़ जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है। भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसीलिए मंदिर और आसपास की ऐसी जगहों को चिन्हित कर वहां पर अंशकालिक व दीर्घकालिक व्यवस्थाएं बनाई जाए।
बैठक में निर्णय लिया गया है कि सभी मार्गों का चैड़ीकरण कराया जायेगा। इसके साथ ही बैठक में ये भी तय हुआ है कि धार्मिक स्थलों में भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का प्रयोग भी किया जाए। अगर कहीं भीड़ अधिक होती है तो तत्काल यात्रियों को रोककर उनके ठहरने की व्यवस्था हो सके, ऐसी सुविधा विकसित की जाये।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक धार्मिक स्थल के लिए रूट और सर्कुलेशन प्लान तैयार किया जाए, ताकि धार्मिक स्थलों में अचानक भीड़ न हो. भीड़ अधिक होने की संभावना पर श्रद्धालुओं को कहां-कहां रोका जा सकता है कि उसका स्थान निर्धारित किया जाए।
मुख्य सचिव ने श्रद्धालुओं की संख्या का आकलन करने के लिए तकनीक का उपयोग करते हुए भीड़ प्रबंधन तंत्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पहले चरण में नीलकंठ, मनसा देवी, चंडी देवी, कैंची धाम और पूर्णागिरि मंदिर का विशेषज्ञों के माध्यम से अध्ययन कराया जाएगा। सभी कामों के लिए इंजीनियरिंग की सहायता भी ली जाये।
शासन का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर हर साल भीड़ बढ़ रही है। इसीलिए यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ जरूर कदम उठाए जाने की जरूरत है। उसी को लेकर 29 जुलाई को हुई बैठक में कुछ निर्णय लिए गए।


